आज के समय में जब कई अधिकारी सोशल मीडिया, प्रचार और दिखावे में ज्यादा दिखाई देते हैं, वहीं कुछ अफ़सर ऐसे भी हैं जो बिना शोर-शराबे के सिर्फ अपने काम से पहचाने जाते हैं। एम. देवराज उन्हीं अधिकारियों में से एक माने जाते हैं। न कोई पीआर, न कैमरे के सामने बयानबाज़ी, न सोशल मीडिया की चमक — उनकी पहचान सिर्फ काम करने के तरीके से बनी है।
कहा जाता है कि अपने पूरे प्रशासनिक करियर में उन्होंने लगभग 54 पोस्टिंग्स देखी हैं। वजह अक्सर यही बताई जाती है कि जहाँ भी उनकी पोस्टिंग हुई, वहाँ मौजूद भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर उन्होंने सीधे कार्रवाई की। इसी कारण कई बार उन्हें लगातार ट्रांसफर का सामना भी करना पड़ा।
उत्तर प्रदेश में जब उन्हें जीएसटी विभाग की जिम्मेदारी मिली, तब उन्होंने टैक्स चोरी रोकने के लिए कई कड़े कदम उठाए। गुटखा और सरिया जैसी इंडस्ट्रीज़ में उत्पादन और सप्लाई की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए। कई जगहों पर आईटी टीमों को फैक्ट्री गेट पर तैनात किया गया ताकि टैक्स चोरी पर तुरंत नजर रखी जा सके। इन कदमों के बाद कई प्रभावशाली लोगों और अधिकारियों के तबादले भी चर्चा में आए।
उनकी कार्यशैली का एक और पहलू यह बताया जाता है कि वे सिर्फ वरिष्ठ अधिकारियों पर निर्भर नहीं रहते। विभाग के निचले स्तर के कर्मचारियों से भी सीधे संपर्क में रहते हैं। डेली, वीकली और मंथली आधार पर वीडियो कॉल या रिपोर्ट के जरिए काम की समीक्षा करते हैं ताकि जानकारी सीधे जमीनी स्तर से मिल सके।
कई बार यह भी कहा जाता है कि जिस विभाग में उनकी नियुक्ति होती है, वहाँ के कुछ भ्रष्ट अधिकारी उनके खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश करने लगते हैं। वजह यह मानी जाती है कि सख्त और पारदर्शी कामकाज की शैली कई लोगों के लिए असहज हो जाती है।
यूपीपीसीएल में उनकी तैनाती और बाद में वहां से हटाए जाने को लेकर भी कई तरह की चर्चाएँ हुई थीं। समर्थकों का मानना है कि उनकी सख्त कार्यशैली और ईमानदार छवि के कारण उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा।
आज भी प्रशासनिक हलकों में एम. देवराज को एक ऐसे अधिकारी के रूप में देखा जाता है जो बिना शोर किए काम करने में विश्वास रखते हैं। उनके समर्थकों का कहना है कि देश को भाषणों से ज्यादा ऐसे अधिकारियों की जरूरत है जो व्यवस्था के भीतर रहकर ईमानदारी से काम कर सकें।
क्योंकि जब कोई अधिकारी सच में ईमानदार होता है, तो भ्रष्टाचार को सिर्फ नियमों का नहीं, बल्कि उस अधिकारी के फैसलों का भी डर होता है।
सिस्टम के बीच खड़ा एक अफ़सर
नाम – एम. देवराज (IAS, 1996 बैच)
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